प्रेम

हमारे इस छोटे से जीवन में हम न जाने कितने लोगो से मिलते हैं। सबका अलग स्वाभाव, सबकी अपनी एक पसंद-नापसंद, सब एक दूजे से अलग। लेकिन कितना अजीब है ना के इन अनगिनत लोगों में कुछ ही लोग ऐसे होते हैं, जिनसे हम प्यार करते हैं, जिन्हें हम अपना मानते हैं। ये लोग हमारे दोस्त, माता पिता, भाई बहन, अध्यापक, प्रेमी प्रेमिका आदि कोई भी हो सकते हैं। ये कुछ ऐसे लोग हैं जो हमारे लिए ख़ास हैं।

हम अनेक मौकों पर अपना प्यार इनके प्रति ज़ाहिर भी करते हैं। हम इन्हें एहसास दिलाते हैं के ये हमारे लिए, हमारे जीवन में कितने महत्वपूर्ण हैं। लेकिन अगर हम अपने इस प्यार की भावना को इज़हार के बदले अपनी करनी में दर्शाएं, तो क्या ये अच्छा नहीं होगा? सिर्फ प्यार भरे लफ़्ज़ों से प्यार नहीं दिखता। प्यार तो हमें अपनी करनी में ज़ाहिर करना चाहिए। यदि हम किसी पक्षि की प्रशंसा ही करते रहें और उसके प्रति अपना प्रेम कविताएँ लिख कर या किसी और मौखिक रूप से करें, इससे बेहतर तो हम उस नन्हे से जीव को रोज़ दाना पानी डालें। उसे अपना मानकर उसके जीवन को सरल बनाएं। क्या ये बेहतर नहीं?


खैर लफ़्ज़ों की भी अपनी अलग एहमियत है। ये भी तो हमें अपनी भावनाएं व्यक्त करने में सहायक होते हैं। लेकिन कर्मों का अपना अलग अस्तित्व है। हमारे कर्म हमारी पहचान हैं। हमारे कर्मों से ही हम जाने जातें हैं।

कभी भी अपने किसी प्रिय इंसान से प्रेम ज़ाहिर करें तो अपनी करनी का भी ध्यान रखें। उनके सुख दुःख का सहभागी बनें। उनकी उलझनों को अपना मानकर उनका हल खोजें। उनके प्रति प्रेम को चाशनी भरे शब्दों के बदले चाशनी भरी करनी में दर्शाएं। जीवन और मधुर प्रतीत होगा।।

Comments

Anonymous said…
लिखते रहें,आपकी लेखनी मन को संतोष पहुंचाती है।
गदगद।
Unknown said…
too good
prem is a unique thing . i think everytrhing attached here to prem .
if you wanna do something unique in your life .
first you must be happy ,for being happy ,you must be in love with your work .