खुशियाँ 😁
आज आप दिन में कितनी बार हँसे, कितनी बार ख़ुशी का एहसास हुआ? ये कुछ प्रशन हैं जो सीधे सादे हैं पर बहुत गहरे हैं। अब आप ये सोच रहे होंगे के गहरे क्यूँ?
अरे जनाब, तनिक ठहरिये इतनी भी जल्दी क्या है। इसी जल्दी जल्दी के चक्कर में तो आप एक चीज़ ज़िन्दगी में भूल ही गए हैं शायद। ज़िन्दगी को आप बुलेट ट्रेन से भी ज़्यादा रफ्तार में जी रहें हैं, पर स्टेशन पर तो आप कुछ भूल ही गए हैं। चलो मैं ही बता देती हूँ, वो अनमोल चीज़ है आपकी हंसी, आपके चेहरे की वो मुस्कान जिसपर बोहोत लोग फ़िदा हैं। अरे जनाब शर्माइये मत, शायद आपको कोई इंसान याद आ रहा है।😄
खैर मैं बोल रही थी के आज आप दिन में कब खुल के हँसे? कब आपके मन को सुकून मिला? ज़रा याद तो कीजिये। यदि आपको याद नहीं आ रहा तो मैं बता दूं के आप हंसना, खुश रहना भूल गए हैं जनाब।
हम सब इंसान अपने अपने सफ़र पर निकलते हैं। सबका अपना अपना रास्ता, अपनी एक मंज़िल और इस दरमियाँ, कुछ मुसीबतें, कुछ दुःख भरी घड़ियाँ, कुछ सुख के सुनहरे पल, तो कुछ लड़ाई और झगड़े। इस पृथ्वी पर कोई इंसान हमेशा खुश रहे, ये असत्य है और कोई हमेशा दुःखी रहे ये भी असत्य है। सबके जीवन में सुख दुःख की घड़ियाँ आती रहती हैं।
आज इंसान पैसे से अपनी खुशियाँ जोड़ता है। हां मैं मानती हूँ पैसा जीवनयापन का एक बोहोत ज़रूरी हिस्सा है। पैसे से हम एक संतोषजनक जीवन जी सकते हैं। लेकिन पैसे के पीछे भागते रहना, ये भी उचित नहीं। हमारे आस पास कितने ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हैं, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, पर उनके चेहरे की मुस्कान कहीं खो सी गयी है। उनका पैसा उनकी इस कमी को पूरा नही कर सकता। वही कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनका जीवन बहुत कष्टदायी है, जीवन के संसाधन ही पर्याप्त नहीं हैं, पर वो लोग मुस्कुराते हैं, खुश रहते हैं। शायद उनकी खुशियों का स्त्रोत कुछ और है। पर ऐसे लोग हर परिस्तिथि में खुशियाँ ढूंढ ही लेते हैं।
अगर मैं अपनी बताऊँ तो अब तक की ज़िन्दगी में बोहोत उतार चढ़ाव देखे हैं। आर्थिक कष्टि के दिन भी देखे हैं, और होंसला टूटते वाले दिन भी। किन्तु मेरी ख़ुशी हंसी बरकार रही। मेरी माँ कहती है, अगर अच्छे दिन नही रहे तो बुरे भी नहीं रहेंगे। फिर क्या था, बस ज़िन्दगी का ये मन्त्र बन गया। दुःख और पीड़ा तो आएंगी ही और ये ज़रूरी भी हैं, हम ज़िन्दगी में इन्हीं से सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं। यही वो समय होता है जब हमारी परीक्षा होती है। या तो हम इस समय को हँसते खेलते बीता लें या दुखी हो कर, निर्भर हम पर करता है। किन्तु हँसते रहने से क्या ये मुसीबते सरल नहीं हो जाएंगी ?😏
अच्छा तो अब आप ये सोचिये के आपको ख़ुशी किन किन चीज़ों से मिलती है। आपकी पढ़ाई लिखाई, आपके माता पिता, भाई बहन, आपका काम, या कुछ और। लेकिन आपको एक बात बताऊ, खुशियां हमारे आस पास ही होती हैं, यहीं कहीं, बस उन्हें ढूंढने की ज़रुरत है। मैं अपनी बताऊ तो आज कल मुझे न्या न्या प्यार हुआ है। अरे ठहरिये जनाब कोई इंसान से नहीं बल्कि गिलहरी से। अरे आप हंसिए मत, वो बोहोत ही प्यारी है। वो मेरी गिल्लू है🐿। जबसे lockdown के बाद मैं घर आई हूँ, इनकी दीवानी हो गयी हूँ। मेरा दिन इन्ही के साथ शुरू होता है। मैं उठती हूँ सुबह और जल्दी से बाहर जाती हूँ इन्हें दाना डालने। आपको पता है ये बोहोत चटोरी हैं😂 पर कोई नहीं अब ये मेरी प्रिय हैं। इनका ध्यान रखना मेरी ज़िम्मेदारी है। इनका एक दूसरे के पीछे भागना, यूँ अपने छोटे छोटे हाथ से खाना, यूं छत पर इधर उधर मटकना, मुझे बोहोत पसन्द है। मै तो जैसे इनकी फैन हो गयी। इनके साथ समय बिताना मन को आन्दित कर देता है।
देखा आपने हमें खुशियां एक वो गिलहरी भी दे देती है जिसे ये भी नही पता कि मैं कौन हूँ। जो बस अपनी दुनिया में मगन रहती है, वो मेरी खुशिओं का स्त्रोत है।
मेरा परिवार, मेरी खुशियां हैं। मेरे माँ बाप जो मेरी ख़ुशी के लिए संघर्ष करते हैं। मेरे भाई बहन का प्यार मुझे खुशियां देता है। दूसरों की सहायता करके मुझे अनमोल ख़ुशी का उपहार मिलता है। ऐसी ही छोटी छोटी चीज़ें हमारी खुशियो में अपना सहयोग देती हैं, बस उन्हें ढूंढने की ज़रुरत है।
इस वायरस की घडी में न जाने कितने लोगों की नौकरी, उनके जीवनयापन का साधन उनसे छिन गया। कितने लोगों को इस समय आर्थिक कष्ट भोगना पड़ रहा है। हम सबके लिए ये दुःख का समय है क्योंकि हम सब इससे प्रभावित हैं। किन्तु किसी को भी कोसने से कुछ हासिल नही होगा। ज़रूरी है के हम इस समय को मुस्कान के साथ पार करें। नई हिम्मत और ऊर्जा से बिखरे हुए को दोबारा समेटें। यदि मन में होंसला और चेहरे पर मुस्कान रखेंगे, तो जीवन में किसी के लिए मिसाल बनेंगे। और जीवन और मधुर प्रतीत होगा।😊
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